पदार्थ का अणुगति सिद्धांत | Kinetic Theory Of Matter

Kinetic Theory Of Matter

पदार्थ के मूल लक्षण
Basic Characteristics of Matter

  • प्रत्येक पदार्थ अणुओं से मिलकर बना है। ये निरन्तर गति करते हैं।
  • अणुओं की यह गति अनियमित (चाल व दिशा का बार-2 बदलना) होती है। अणुओं की इस गति को आणविक प्रक्षोभ कहते हैं।
  • पदार्थ के अन्दर किन्ही दो निकटवर्ती अणुओं के बीच में रिक्त स्थान होता है जिसे अन्तराण्विक स्थान कहते हैं।
  • पदार्थ के अणुओं के बीच एक बल कार्य करता है जिसे अन्तराण्विक बल कहते हैं। इस बल की प्रकृति विद्युतीय होती है।

पदार्थ का अणुगति सिद्धान्त
Kinetic Theory of Matter


इस सिद्धान्त के अनुसार पदार्थ विभिन्न अवस्थाओं (ठोस, द्रव तथा गैस) में पाया जाता है। ठोस, द्रव तथा गैस के लिये अणुगति मॉडल प्रतिपादित किये गये हैं।

गैस का अणुगति मॉडल
Kinetic Model of Gas


  • गैस के अणु अनियमित रूप से गति करते रहते हैं।एक निश्चित गैस के अणु एकसमान सुदृढ़ तथा अति सूक्ष्म कण होते हैं। अणुओं का अपना आयतन, गैस के आयतन की तुलना में उपेक्षीय होता है।
  • गैस के अणु एक-दूसरे से दूर-दूर होते है। अत: अणुओं के बीच आकर्षण अथवा प्रतिकर्षण बल कार्य नहीं करता। जैसे ही दो अणु एक-दूसरे के पास आते हैं, उनके बीच आकर्षण बल कार्य करने लगता है और अत्यन्त निकट आने पर प्रतिकर्षण बल कार्य करने लगता है।
  • दो अणुओं के बीच की टक्कर पूर्णतया प्रत्यास्थ होती है। परिणामस्वरूप दोनों अणु विपरीत दिशाओं में उसी चाल से लौट जाते हैं, जिससे वे टकराते है। सामान्य ताप व दाव पर उनकी गतिज ऊर्जा में कोई परिवर्तन नहीं होता।
  • गैस के अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा गैस के ताप पर निर्भर करती है और उसके परमताप के समानुपाती होती है।
ठोस का अणुगति मॉडल 
Kinetic Model of Solid

  • ठोस के अणुओं के बीच की दूरी, साम्य दूरी 10-10 मी) के लगभग बराबर होती है।
  • प्रत्येक अणु की स्थिति निश्चित तथा नियमित क्रम में होती है।
  • ठोस को गर्म करने से उसके अणुओं के दोलनों का आयाम बढ़ जाता है जिससे उनके मध्य अन्तराण्विक दूरी बढ़ जाती है। इस प्रकार ठोस का प्रसार हो जाता है।

द्रव का अणुगति मॉडल
Kinetic Model of Liquid


  • द्रव के अणुओं के मध्य अन्तराण्विक दूरी गैस के अणुओं से कम व ठोस के अणुओं से अधिक होती है।
  • दो अणुओं के बीच आकर्षण बल, गैस के अणुओं से अधिक लेकिन ठोस के अणुओं से कम होता है।
  • द्रव के अणुओं की ऊर्जा गैस के अणुओं से कम लेकिन ठोस के अणुओं से अधिक होती है। यही कारण है कि द्रव के अणु एक-दूसरे के आकर्षण क्षेत्र में बँधे नहीं रह पाते और द्रव के अन्दर अनियमित गति करते रहते है।
  • द्रव में उसके अणुओं की स्थिति निश्चित नहीं होती है।
  • द्रव का आयतन निश्चित होता है लेकिन उसका आकार अनिश्चित होता है।

बॉयल का नियम
Boyle's Law


स्थिर ताप पर गैस के निश्चित द्रव्यमान का आयतन गैस के दाब के व्युत्क्रमानुपाती होता है ।
नीचे दाब तथा ऊँचे ताप पर सभी गैसें बॉयल के नियम का अधिक सीमा तक पालन करती हैं।


चार्ल्स का नियम Charles' Law

स्थिर दाब पर किसी भी गैस के एक निश्चित द्रव्यमान का
आयतन, 1°C ताप बढ़ाने पर अपने 0°C के आयतन का
¹/₂₇₃ भाग बढ़ जाता है।

यदि 0°C पर आयतन V₀ तथा t°C पर Vt है तो
अत: गैस के निश्चित द्रव्यमान का आयतन उसके परमताप के अनुक्रमानुपाती होता है।



दाब का नियम Law of Pressure

स्थिर आयतन पर किसी गैस के निश्चित द्रव्यमान का दाब, 1°C ताप बढ़ाने पर अपने 0°C के दाब का भाग बढ़ जाता है।

किसी गैस का दाब उसके ताप के समानुपाती होता है ।

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